बांदा। बांदा अभी डार्क जोन में चल रहा है। इसे डार्क जोन से बाहर निकालने के लिए जल संरक्षण के लिए तमाम उपाय जरूरी हैं। इसमें मेड़बंदी, अमृत सरोवर, साेकपिट समेत अन्य कार्य कराने के लिए जन समुदाय की भागीदारी बेहद अहम है। यह बात मेडिकल कॉलेज में जल जीवन मिशन के तहत आयोजित गोष्ठी में केंद्र सरकार की नेशनल वाटर मिशन की अपर सचिव अर्चना वर्मा ने कही। कार्यक्रम को जल शक्तिमंत्री व सासंद समेत अन्य ने भी संबोधित करते हुए जल संरक्षण के लिए कार्य करने वालों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया।।
अपर सचिव एवं मिशन निदेशक, नेशनल वाटर मिशन केंद्र सरकार अर्चना वर्मा की अध्यक्षता में रानी दुर्गावती मेडिकल काॅलेज के प्रेक्षागृह में अविरल जल अभियान के अंतर्गत गोष्ठी और सम्मान समारोह का आयोजन बुधवार को हुआ। अपर सचिव ने कहा कि पानी के बिना जीवित नहीं रहा जा सकता है इसलिए पानी का संचयन अति आवश्यक है।
बताया कि जनपद बांदा डार्क जोन में चल रहा है। इसलिए मेड़बन्दी, अमृत सरोवरों का निर्माण, खेत-तालाब योजना व अन्य कार्य जल संचयन एवं संरक्षण के लिए किये जा रहे हैं। बताया कि 40 प्रतिशत भूभाग में ही पानी है। कहा कि जलशक्ति से नारीशक्ति एवं नारीशक्ति से जलशक्ति बने। इसके लिए बुंदेलखंड में जल संचयन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी करने के लिए जल सहेली बनाएं।
उन्होंने महिलाओं को कहा कि पानी के महत्व को समझें और एकजुट होकर जल संग्रह के कार्य में सहयोग करें। जलशक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद ने कहा कि बांदा में हर घर नल योजना पानी की कमी को देखते हुए संचालित की जा रही है। वैदिक परम्परा के अनुसार पहले पोखर एवं कुओं का निर्माण किया जाता था।
अब अमृत सरोवरों एवं अन्य उपाय किए जा रहे हैं। इसमें जनभागीदारी जरूरी है। सांसद आर के सिंह पटेल ने कहा कि बुंदेलखंड में खटान एवं अमलीकौर पाइप पेयजल योजना से बबेरू से कालिंजर तक पानी पहुंचाया जा रहा है। जलश्रोतों में पानी के रुकने के लिए आवश्यक प्रबंधन किए जाए।
आयुक्त आरपी सिंह ने जल दोहन रोकने के लिए प्राकृतिक खेती के साथ आवर्तनशील खेती करें। इससे एक हेक्टेयर में छह से आठ लाख रुपये तक की प्रतिवर्ष आय होगी। कहा कि कम पानी वाली फसलों जैसे श्रीअन्न के उत्पादन को भी बढ़ाने पर जोर दें। कहा इससे बांदा को डार्क जोन से निकालने में सफलता अवश्य मिलेगी।
डीएम दुर्गाशक्ति नागपाल ने बताया कि अविरल जल अभियान के एक मई से शुरू किया गया था। बताया कि 200 तालाबों का कार्य पूर्ण हो गया है। जल संरक्षण एवं अन्य कार्यों के लिए 11.5 लाख मानव दिवस सृजित किये गये हैं।
इनसेट
कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण एवं संचयन के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रधान, पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसमें पतौरा प्रधान विनीता त्रिपाठी, प्रमोद द्विवेदी सचिव, कमला प्रधान कोर्रा समेत अन्य शामिल रहे। कार्यक्रम में पद्मश्री जलयोद्धा उमाशंकर पाण्डेय, जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल समेत अन्य रहे।
