बांदा। शहीदाने कर्बला की याद में मनाए जाने वाले मोहर्रम की 10वीं को शहर के विभिन्न इमामबाड़ों से ताजिया और ढाल सवारियां अपने परंपरागत मार्गों से होते हुए कर्बला पहुंचे। यहां प्रशासन द्वारा बनाए गए गड्ढों में उन्हें दफन किया गया। उधर, शिया समुदाय के लोगों ने पूर्वी कोठी से अलम जुलूस निकालकर मातम करते हुए कर्बला पहुंचे। सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र हिंदू-मुस्लिम सौहार्द की प्रतीक रामा के इमामबाड़े की ढाल रही। उधर, नौवीं की रात शहर के 52 इमामबाड़ों में अलाव से मातम किया।
मोहर्रम की श्रृंखला शनिवार से समाप्त हो गई। आखिरी दिन शहर में स्थित 52 इमामबाड़ों से ताजिया और ढाल सवारियां मातमी धुनों के बीच निकाली गई। यह सभी अपने परंपरागत मार्ग छावनी रोड से बलखंडी नाका और कटरा मोहल्ले होते हुए कर्बला पहुंचीं। यहां प्रशासन द्वारा तैयार किए गए बड़े-बड़े गड्ढों में ताजियों को दफनाया गया। इस अवसर पर अकीदतमंदों को भारी हुजूम मौजूद रहा। रोजेदारों के लिए मोहर्रम इंतजामिया कमेटी के लोगों ने रोजा इफ्तार का भी इंतजाम किया गया था। यहां मगरिब की नमाज के बाद अकीदत मंदों ने रोजा अफ्तार किया। सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र सब्जी फरोशों का ताजिया और हिंदू-मुस्लिम सौहार्द का प्रतीक रामा के इमामबाड़े की ढाल सवारी रही। चांदी के मन्नत के नीबू से लदी यह ढाल अपने परंपरागत मार्गों से होती हुई कर्बला पहुंची। क्योटरा रेलवे क्रॉसिंग के पास पैतरा भी खेला गया।
दहकते अंगारों को फूलों की मानिंद उछाला
बांदा। मोहर्रम की नौंवी की रात शहर के 52 इमामबाड़ों में अलाव का मंजर आम रहा। यहां अकीदतमंदों ने दहकते अंगारों को फूलों की मानिंद हवा में उछालकर शहीदों को अपनी अकीदत पेश की। सबसे ज्यादा मजमा अलीगंज स्थित रामा के इमामबाड़े में रहा। यहां लोगों ने चांदी के नीबू मन्नत के रूप में चढ़ाकर मन्नत मानी। उधर, घरों में भी शहीदों की फातिहा ख्वानी कराई गई। किसी ने रियूड़ी तो किसी ने खिचड़ा और हलीम में फातिहा दिलाई।
मोहर्रम के आयोजन में मुस्तैद रहा प्रशासन
बांदा। मोहर्रम के आयोजन को लेकर प्रशासन भी खासा सर्तक रहा। बलखंडीनाका चौकी पर सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार, सीओ सिटी गवेंद्र पाल गौतम, सीओ सदर अंबुजा त्रिवेदी, शहर कोतवाल मनोज शुक्ल समेत कई थानों का फोर्स और पीएसी बल सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रहा। कर्बला में नगर पालिका की ओर से पीने के पानी के लिए टैंकरों का इंतजाम भी किया गया था। मार्गों में कलई और चूना भी डलवाया गया था।
ग्रामीण क्षेत्रों में निकले ताजिया व ढाल सवारी
बांदा। ग्रामीण क्षेत्रों में मोहर्रम की 10वीं को इमाम हुसैन की शहादत को याद किया गया। नरैनी कस्बा सहित आसपास के गांवों में ताजिया ढाल सवारी जुलूस निकाला गया। हालांकि ताजियों को कस्बा भ्रमण के बाद इमामबाड़ों में रख दिया गया। रविवार को इन्हें सुपुर्द ए खाक किया जाएगा। इस दौरान पुलिस बल भी मौजूद रहा। जगह-जगह लंगर लुटाए गए। एम ए हादी नियाजी, मोहम्मद सिराज, सोनू, बशीर गिरधारी लाल गुप्ता, फखरुद्दीन, हरिश्चंद्र सोनकर, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अरविंद सिंह गौर, एसएसआई अनिल कुमार सिंह सहित फोर्स मौजूद रहा। वहीं बदौसा कस्बा सहित दुबरिया, बरकतपुर भुसासी, मढ़वारा गांवों में ताजिया जुलूस निकाला गया। इस दौरान अल्लाह हू अकबर, या अली या अली व या हुसैन या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं। जगह-जगह लंगर लुटाए गए, शर्बत व खिचड़ा बांटा गया। तिंदवारी कस्बे में जुलूस कदीमी इमामाबाड़ा से ताजिया जुलूस निकाला गया। मुख्य मार्गों से होते हुए काले शहीद बाबा के पास कर्बला में समापन हुआ। मुस्लिम कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद साबिर, सीओ सदर अंबुजा त्रिवेदी मौजूद रहीं।
